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24 जिलों में औद्योगिक विकास हेतु सामाजिक प्रभाव आकलन शुरू

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बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को तेज करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देशानुसार नए औद्योगिक पार्कों के लिए 24 जिलों में कुल 11,713 एकड़ से अधिक भूमि के अधिग्रहण हेतु सामाजिक प्रभाव आकलन की शुरुआत कर दी गई है। यह आकलन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है कि भूमि अधिग्रहण स्थानीय समाज और आम जनता के हित में हो और किसी भी तरह का आर्थिक या सामाजिक नुकसान न हो।
सामाजिक प्रभाव आकलन के दौरान जन सुनवाई का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोगों की राय और आपत्तियों को दर्ज किया जाता है। इसके माध्यम से नागरिकों को यह अवसर मिलता है कि वे प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के लाभ और संभावित प्रभाव के बारे में अपनी बात रख सकें। विभागीय सूत्रों के अनुसार, गया, वैशाली और बेगूसराय समेत कई जिलों में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव है, जिससे भविष्य में मेगा औद्योगिक पार्कों के निर्माण की राह साफ होगी और राज्य में रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।
हाल ही में विभागीय निदेशक की अध्यक्षता में भू-अर्जन पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन जिलों को सामाजिक प्रभाव आकलन के लिए आवंटन मिल चुका है, वहां यह प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि कुछ जिलों में जन सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और संबंधित एजेंसियों को अपनी रिपोर्ट जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को सौंपने का आदेश दिया गया है। वहीं, कुछ जिलों में अब तक औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) से आवश्यक अधियाचना नहीं भेजी गई है, जिसे शीघ्र पूरा करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि भूमि अधिग्रहण और सामाजिक प्रभाव आकलन की इस प्रक्रिया के सफल समापन के बाद बिहार में औद्योगिक बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल प्रदेश को निवेश के अनुकूल और उद्योग-मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और स्थानीय जनता की भागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि औद्योगिक परियोजनाओं के विकास के साथ ही सामाजिक और आर्थिक हितों का संतुलन भी सुनिश्चित किया जा सके।

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